Chaitra Navratri 2026 Puja Rules: चैत्र नवरात्र का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। हर साल नवरात्र के नौ दिनों के दौरान कई महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर आता है कि यदि इन नौ दिनों के बीच पीरियड्स (माहवारी) आ जाएं, तो क्या व्रत जारी रखना चाहिए या संकल्प तोड़ देना चाहिए? ज्योतिष शास्त्र और हमारे धर्म ग्रंथ इस विषय में बहुत ही स्पष्ट और व्यावहारिक जानकारी देते हैं।
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, माहवारी एक प्राकृतिक और स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे ईश्वर ने ही बनाया है। इसलिए सबसे पहले मन से किसी भी प्रकार का अपराध बोध (Guilt) निकाल देना चाहिए। यदि आपने नौ दिनों के व्रत का संकल्प लिया है और बीच में पीरियड्स आ जाते हैं, तो आप अपना व्रत पूरी श्रद्धा के साथ जारी रख सकती हैं और फलाहार ग्रहण कर सकती हैं। हालांकि, यदि शारीरिक कमजोरी या बहुत अधिक दर्द महसूस हो, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी धर्म सम्मत है।
मानसिक पूजा का विशेष महत्व
‘धर्म सिंधु’ और अन्य स्मृति ग्रंथों के अनुसार, ऐसी स्थिति में शारीरिक रूप से मंदिर जाना या मूर्तियों और पूजा सामग्री को छूना वर्जित माना गया है, लेकिन ‘मानसिक पूजा’ के द्वार हमेशा खुले रहते हैं। मानसिक पूजा को शास्त्रों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। आप मन ही मन मां दुर्गा के मंत्रों का जप कर सकती हैं और दुर्गा सप्तशती या चालीसा का पाठ सुन सकती हैं। मोबाइल या अन्य माध्यमों से पाठ सुनने में कोई दोष नहीं माना गया है।
पूजा और कन्या पूजन के लिए अपनाएं ये जरूरी नियम:
- सेवा कार्य: घर के मंदिर की सफाई, जोत जलाना या आरती जैसे कार्य स्वयं करने के बजाय परिवार के किसी अन्य सदस्य से करवाएं।
- प्रसाद निर्माण: अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के लिए बनाया जाने वाला हलवा, पूरी या चना स्वयं न बनाएं। इसे घर का कोई दूसरा सदस्य तैयार कर सकता है।
- कन्या पूजन विधि: कन्याओं को भोजन कराते समय उनके पैर छूने के बजाय दूर से ही हाथ जोड़कर प्रणाम करें और अपनी श्रद्धा व्यक्त करें।
- श्रद्धा भाव: शास्त्रों के अनुसार, शुद्ध मन और सच्ची श्रद्धा से किया गया व्रत पूरी तरह सफल और फलदायी माना जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषियों के परामर्श पर आधारित है। नवरात्र के नियमों का पालन अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार करें। यह वेबसाइट किसी भी प्रकार के अंधविश्वास का समर्थन नहीं करती और पाठकों से विवेकपूर्ण निर्णय लेने का आग्रह करती है।
