Kharmas 2026: खरमास के दौरान रोजाना करें सूर्य चालीसा का पाठ, चमक उठेगा भाग्य और दूर होंगे सभी कष्ट

Divyanshu Prajapati
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Divyanshu Prajapati
दिव्यांशु प्रजापति Prime Sathi पर एजुकेशन और टेक्नोलॉजी से जुड़ा सरल और भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं। वे जटिल जानकारी को आसान भाषा में प्रस्तुत करते हैं,...
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Kharmas 2026 Significance: हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस समय को खरमास या मलमास कहा जाता है। इस वर्ष खरमास का आरंभ 15 मार्च से हो चुका है, जो आगामी 14 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे एक महीने की अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ जैसे मांगलिक एवं शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक रहती है, लेकिन जप, तप और दान-पुण्य के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

खरमास के दौरान सूर्य देव की उपासना का विशेष फल मिलता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस अवधि में यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से सूर्य चालीसा का पाठ करता है, तो उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सोई हुई किस्मत चमक उठती है। सूर्य चालीसा का पाठ न केवल व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि करता है, बल्कि यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और दरिद्रता को दूर करने में भी सहायक माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि खरमास में सूर्य देव थोड़े धीमे पड़ जाते हैं, ऐसे में उनकी स्तुति करने से साधक को विशेष ऊर्जा और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

☀️ सूर्य चालीसा (Surya Chalisa Full Lyrics)

॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥

॥ चौपाई ॥

जय सविता जय जयति दिवाकर! सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर! सविता हंस! सुनूर विभाकर॥
विवस्वान! आदित्य! विकर्तन। मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते। वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥

सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि। मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर। हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥
मंडल की महिमा अति न्यारी। तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते। देखि पुरन्दर लज्जित होते॥

मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर। सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै। हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥
द्वादस नाम प्रेम सों गावैं। मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै। दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥

नमस्कार को चमत्कार यह। विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई। अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥
बारह नाम उच्चारन करते। सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन। रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है। प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते। रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत। कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित। भास्कर करत सदा मुखको हित॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे। रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा। तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥
पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर। त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन। भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥

बसत नाभि आदित्य मनोहर। कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा। गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥
विवस्वान पद की रखवारी। बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै। रक्षा कवच विचित्र विचारे॥

अस जोजन अपने मन माहीं। भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै। जोजन याको मन मंह जापै॥
अंधकार जग का जो हरता। नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही। कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

मंद सदृश सुत जग में जाके। धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा। किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों। दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
परम धन्य सों नर तनधारी। हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन। मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
भानु उदय बैसाख गिनावै। ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
यम भादों आश्विन हिमरेता। कातिक होत दिवाकर नेता॥
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं। पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं॥

॥ दोहा ॥

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

आध्यात्मिक उन्नति चाहने वाले लोगों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। सूर्य चालीसा के पाठ के साथ-साथ इस माह में भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा का भी विधान है। जो लोग प्रतिदिन सुबह स्नान के पश्चात उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य चालीसा का गायन करते हैं, उनके पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। खरमास की इस पावन अवधि को केवल निषेध का समय न मानकर भक्ति और साधना का अवसर मानना चाहिए, ताकि सूर्य देव की कृपा से जीवन के सभी अंधकार दूर हो सकें।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय पंचांग और प्रचलित सूचनाओं पर आधारित है। लेख का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता फैलाना है। किसी भी उपाय या पूजा विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। यह वेबसाइट किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देती है।

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दिव्यांशु प्रजापति Prime Sathi पर एजुकेशन और टेक्नोलॉजी से जुड़ा सरल और भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं। वे जटिल जानकारी को आसान भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि छात्र और आम पाठक दोनों ही जल्दी समझ सकें। उनका उद्देश्य, समय पर सही जानकारी देकर लोगों को पढ़ाई और टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने में मदद करना है।
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