Global Energy Crisis: जंग के साये में क्रूड ऑयल $146 के पार, भारत में ₹15 तक महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल; कतर का प्लांट बंद

Ram Pravesh Kumar
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Ram Pravesh Kumar
राम कुमार Prime Sathi पर Latest News और सरकारी योजनाओं से जुड़ा भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं। वे जटिल जानकारी को आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत...
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Crude Oil Price Hike: खाड़ी देशों (Gulf Countries) में गहराते युद्ध के संकट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में आग लगा दी है। ईरान द्वारा ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद 19 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 30% तक का उछाल देखा गया है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि ‘इंडियन बास्केट’ में क्रूड की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। यदि कीमतें इसी स्तर पर रहीं, तो देश में पेट्रोल और डीजल के दाम 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।

भारत पर होने वाले असर को समझें (2 मुख्य पॉइंट्स)

  1. पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि:भारत अपनी जरूरत का 85% तेल और 50% गैस आयात करता है। ब्रेंट क्रूड के 73 डॉलर से बढ़कर 114 डॉलर और इंडियन बास्केट के 146 डॉलर पर पहुंचने से सरकारी तेल कंपनियों के लिए पुरानी कीमतों पर ईंधन बेचना नामुमकिन हो जाएगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा तो दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 1-2 हफ्तों में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी अनिवार्य हो सकती है।
  2. बेकाबू हो सकती है महंगाई:कच्चा तेल केवल ईंधन नहीं, बल्कि पेंट, प्लास्टिक, दवाइयों और उर्वरकों (Fertilizers) के लिए भी कच्चा माल है। डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई (Logistics) महंगी होगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अनाज की कीमतों पर पड़ेगा। इससे आम आदमी का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है।

सप्लाई चैन टूटने की 2 बड़ी वजहें

  • कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद: ईरान के हमलों में कतर के रास लफ्फान (LNG हब) को भारी नुकसान हुआ है। यह दुनिया की 20% एलएनजी सप्लाई का केंद्र है। प्लांट बंद होने से वैश्विक स्तर पर गैस की किल्लत शुरू हो गई है, जिससे यूरोप में गैस की कीमतें 30% और ब्रिटेन में 140% तक बढ़ गई हैं।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर खतरा: यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जिससे विश्व का 20% पेट्रोलियम गुजरता है। भारत अपना 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगाता है। युद्ध के कारण यह मार्ग असुरक्षित हो गया है, जिससे टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप है।

शेयर बाजार में हाहाकार: 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट

जियोपॉलिटिकल तनाव का असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिखा। 19 मार्च को सेंसेक्स 2497 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 776 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए हैं और बैंकिंग व ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों और वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों पर आधारित है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव का अंतिम फैसला भारत सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करेगा।

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राम कुमार Prime Sathi पर Latest News और सरकारी योजनाओं से जुड़ा भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं। वे जटिल जानकारी को आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर पाठक बिना किसी परेशानी के समझ सके। उनका उद्देश्य, लोगों तक सही, उपयोगी और समय पर जानकारी पहुँचाकर उन्हें जागरूक और अपडेटेड रखना है।
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