Chaitra Navratri 2026: नवरात्र के 9 दिन देवी को लगाएं ये 9 दिव्य भोग, मां शेरावाली की कृपा से पूरी होगी हर मनोकामना

Ram Kumar
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Chaitra Navratri 2026 Bhog List: चैत्र नवरात्र का पवित्र त्योहार शुरू हो चुका है और चारों ओर मां दुर्गा की भक्ति की लहर है। हिंदू धर्म में नवरात्र के नौ दिनों का विशेष महत्व है, जिसमें मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि प्रत्येक दिन देवी के स्वरूप के अनुसार उन्हें उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाए, तो साधक को आरोग्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस लेख में हम आपको विस्तार से बता रहे हैं कि नवरात्र के दौरान किस दिन मां के किस स्वरूप को क्या भोग लगाना चाहिए, जिससे आपकी पूजा पूर्ण और सफल हो सके।

मां शैलपुत्री से मां सिद्धिदात्री तक: 9 दिनों की भोग सूची

प्रथम दिन (मां शैलपुत्री)

नवरात्र के पहले दिन हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री की पूजा होती है। उन्हें गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे शरीर निरोगी रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।

द्वितीय दिन (मां ब्रह्मचारिणी)

दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी को शक्कर, सफेद मिठाई और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि इससे लंबी आयु और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

तृतीय दिन (मां चंद्रघंटा)

दुखों का नाश करने वाली मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां या खीर का भोग प्रिय है। यह भोग मानसिक शांति और ऐश्वर्य प्रदान करता है।

चतुर्थ दिन (मां कुष्मांडा)

चौथे दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ चढ़ाया जाता है। इस दिव्य भोग को अर्पित करने से बुद्धि तेज होती है और निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।

पंचम दिन (मां स्कंदमाता)

कार्तिकेय जी की माता स्कंदमाता को केला विशेष रूप से प्रिय है। मां को केला अर्पित करने से बेहतर स्वास्थ्य और संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है।

षष्ठ दिन (मां कात्यायनी)

छठे दिन महिषासुर मर्दिनी मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। इससे साधक के व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

सप्तम दिन (मां कालरात्रि)

शत्रुओं का संहार करने वाली मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाया जाता है। इससे गुप्त शत्रुओं से रक्षा होती है और घर में खुशहाली आती है।

अष्टम दिन (मां महागौरी)

अष्टमी के दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए। इससे संतान से जुड़ी समस्याओं का अंत होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

नवमी दिन (मां सिद्धिदात्री)

नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री को तिल, हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाया जाता है। इससे जीवन में हर प्रकार की सिद्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय पंचांग और प्रचलित सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी विशेष फल या सिद्धि के लिए अपनी कुल परंपरा और योग्य विद्वान के परामर्श के अनुसार ही कार्य करें। यह वेबसाइट केवल सूचना साझा करने के उद्देश्य से यह लेख प्रस्तुत कर रही है।

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