New Income Tax Act 2025: भारत में टैक्स भरने वालों के लिए 1 अप्रैल 2026 से एक नया युग शुरू होने जा रहा है। सरकार ने आयकर अधिनियम 1961 को समाप्त कर आयकर अधिनियम 2025 लागू करने का फैसला किया है। हालांकि टैक्स की दरों (Tax Slabs) में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन नियमों के सरलीकरण और अलाउंस की सीमाओं में भारी बढ़ोत्तरी की गई है, जिससे मिडिल क्लास और सैलरीड क्लास को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
‘Tax Year’ का नया कॉन्सेप्ट और डेडलाइन
अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ के उलझाव को खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ एक ‘टैक्स ईयर’ होगा।
- साधारण ITR (1 और 2): 31 जुलाई तक।
- बिजनेस ITR (3 और 4): 31 अगस्त तक।
- रिवाइज्ड रिटर्न: टैक्स ईयर खत्म होने के 12 महीने बाद तक फाइल किया जा सकेगा।
HRA (घर किराया भत्ता) में बड़ा बदलाव
HRA छूट के नियमों को और अधिक शहरों के लिए उदार बनाया गया है, लेकिन रिपोर्टिंग सख्त की गई है:
- 50% छूट वाले शहर: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई के साथ अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है। बाकी शहरों के लिए यह 40% रहेगी।
- पैन अनिवार्य: यदि सालाना किराया ₹1 लाख से अधिक है, तो मकान मालिक का पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा।
बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल अलाउंस में 30 गुना बढ़ोत्तरी
दशकों पुराने नियमों को बदलते हुए सरकार ने एजुकेशन अलाउंस में भारी इजाफा किया है:
- शिक्षा भत्ता (Education Allowance): ₹100 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति महीना (अधिकतम 2 बच्चे)।
- हॉस्टल भत्ता (Hostel Allowance): ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीना (अधिकतम 2 बच्चे)।
कंपनी कार और फूड वाउचर के नए नियम
- कार की टैक्सेबल वैल्यू: 1.6 लीटर तक की कार के लिए ₹5,000 और बड़ी कार के लिए ₹7,000 महीना तय किया गया है। ड्राइवर होने पर ₹3,000 अतिरिक्त जुड़ेंगे।
- फ्री फूड/बेवरेज: प्रति मील छूट की सीमा ₹50 से बढ़ाकर ₹200 कर दी गई है।
- गिफ्ट वाउचर: ₹15,000 तक के गिफ्ट या वाउचर अब टैक्स-फ्री होंगे।
कैपिटल गेन और अन्य बदलाव
- होल्डिंग पीरियड: एसेट के कन्वर्जन (जैसे बॉन्ड से शेयर) के मामले में पुराने निवेश की अवधि को भी जोड़ा जाएगा, जिससे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) का फायदा लेना आसान होगा।
- सख्त अनुपालन: विदेशी आय और शेयर बाजार लेनदेन की रिपोर्टिंग को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
विशेषज्ञों की राय
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि इन बदलावों से ‘ट्रस्ट-बेस्ड’ टैक्सेशन को बढ़ावा मिलेगा। जहाँ एक तरफ अलाउंस बढ़े हैं, वहीं दूसरी तरफ 150 से ज्यादा नए फॉर्म्स के जरिए रिपोर्टिंग को व्यवस्थित किया गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह जानकारी सरकार द्वारा जारी अधिसूचना और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। टैक्स प्लानिंग और फाइलिंग से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
