Shitala Mata Mandir Patna City: बिहार की राजधानी पटना के अगमकुआं स्थित मां शीतला मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास का एक जीवंत पन्ना है। 2400 साल पुराने इस मंदिर का संबंध मौर्य वंश के महान सम्राट अशोक के काल से है। नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ता है और ऐसी मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
कुएं की खुदाई से मिला माता का आशीर्वाद
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, सदियों पहले तुलसी मंडी में एक कुएं की खुदाई के दौरान मां शीतला की प्रतिमा खड़ी अवस्था में प्राप्त हुई थी। मूर्ति मिलने के बाद छोटी पहाड़ी, बड़ी पहाड़ी और तुलसी मंडी के निवासियों ने मिलकर इसी स्थान पर माता की प्राण-प्रतिष्ठा की।
अशोक कालीन ‘अगमकुआं’ और मंदिर की विशेषता
मंदिर परिसर में ही सम्राट अशोक के काल का प्रसिद्ध ‘अगमकुआं’ स्थित है। मंदिर की बनावट और यहाँ स्थापित मूर्तियां इसे विशिष्ट बनाती हैं:गर्भगृह: मुख्य मंदिर में माता की प्रतिमा के दाहिने ओर त्रिशूल और पिंडी रूप में योगिनी की पूजा होती है।अंगार माता: शीतला माता की मूर्ति के बाईं ओर अंगार माता की छोटी प्रतिमा स्थापित है।अन्य प्रतिमाएं: मंदिर परिसर में सात शीतला माता (पिंडी रूप), एक भैरव और एक गौरेया बाबा की प्रतिमा भी श्रद्धा का केंद्र है।
श्रद्धालुओं की अटूट आस्था
नवरात्र के दौरान यहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। न केवल पटना, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोग यहाँ विशेष शृंगार और पूजन के लिए आते हैं। भक्त मनोज कुमार बताते हैं कि मंदिर की प्राचीनता और माता का प्रताप ऐसा है कि यहाँ हर दिन सैकड़ों लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर आभार प्रकट करने पहुँचते हैं।
कैसे पहुँचें मां शीतला मंदिर?
मंदिर तक पहुँचने के लिए कई सुलभ मार्ग उपलब्ध हैं:गांधी सेतु मार्ग: कंकड़बाग-कुम्हरार रोड के पूर्व में गांधी सेतु के नीचे से होते हुए जीरो माइल की तरफ से मंदिर पहुँचा जा सकता है।NMCH मार्ग: श्रद्धालु नालंदा मेडिकल कॉलेज (NMCH) मार्ग से आरओबी (ROB) के जरिए अगमकुआं उतरकर सीधे मंदिर जा सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट स्थानीय मान्यताओं, मंदिर के पुजारियों के साक्षात्कार और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित है। धार्मिक अनुष्ठानों के समय में बदलाव मंदिर प्रशासन के निर्णयाधीन है।
