Currency Market Update: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा बाजार से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे टूटकर 93.08 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। इतिहास में यह पहली बार है जब रुपया 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर नीचे गिरा है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते संघर्ष और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी की निकासी ने घरेलू मुद्रा पर भारी दबाव बनाया है।
इन कारणों से आई रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात की वजह से वैश्विक निवेशकों में असुरक्षा का माहौल है, जिसके चलते वे सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर को तरजीह दे रहे हैं। इसके अलावा, डॉलर सूचकांक में 0.17 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है, जो अब 100.25 पर पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की ऊँची कीमतों ने भी रुपये की कमर तोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।
शेयर बाजार की रिकवरी ने संभाला मोर्चा
हालांकि, शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में देखी गई सकारात्मक शुरुआत ने रुपये की गिरावट की गति को कुछ हद तक नियंत्रित किया। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को सेंसेक्स 960 अंकों की उछाल के साथ 75,167 पर और निफ्टी 311 अंकों की बढ़त के साथ 23,313 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यदि शेयर बाजार में यह तेजी नहीं होती, तो रुपये में और भी बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती थी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और क्रूड का हाल
शेयर बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। बीते गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से बाहर निकलने का फैसला किया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.64 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 106.9 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, लेकिन यह स्तर अभी भी आयात बिल बढ़ाने के लिए पर्याप्त है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने का सीधा असर आम आदमी की रसोई और जेब पर पड़ता है। चूँकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए रुपये की कमजोरी से तेल आयात महंगा हो जाएगा। इससे आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका सीधा असर महंगाई बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों का बजट भी बढ़ जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार के आंकड़ों और मौजूदा वैश्विक स्थितियों पर आधारित है। मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव बाजार की गतिविधियों के अनुसार निरंतर जारी रहता है।
