Uber Robotaxi: अब इंसान नहीं रोबोट चलाएंगे उबर की कैब! कंपनी ने की अरबों डॉलर की बड़ी डील, जानें कब से शुरू होगी सर्विस

Ram Pravesh Kumar
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राम कुमार Prime Sathi पर Latest News और सरकारी योजनाओं से जुड़ा भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं। वे जटिल जानकारी को आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत...
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Uber Rivian Deal: भविष्य की परिवहन व्यवस्था अब हकीकत बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। दुनिया की सबसे बड़ी राइड-हेलिंग कंपनी उबर (Uber) अपने मौजूदा मानवीय ड्राइवरों वाले बेड़े को पूरी तरह से ‘रोबोटैक्सी’ में बदलने की योजना पर काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उबर ने अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी रिवियन (Rivian) के साथ हाथ मिलाया है।

अरबों डॉलर का निवेश और भविष्य की तैयारी

उबर और रिवियन के बीच हुआ यह समझौता तकनीकी जगत में हलचल मचा रहा है। उबर ने रिवियन में 1.25 बिलियन डॉलर (लगभग 104 अरब रुपये) तक के निवेश की योजना बनाई है। शुरुआत में कंपनी 300 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी, जो रिवियन की सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक की प्रगति के साथ साल 2031 तक बढ़कर 1.25 बिलियन डॉलर हो सकता है। इस सौदे का मुख्य उद्देश्य उबर के लिए एक सुरक्षित और कुशल ऑटोनोमस व्हीकल नेटवर्क तैयार करना है।

50 हजार रोबोटैक्सी खरीदने का विकल्प

इस बड़े समझौते के तहत उबर ने रिवियन की नई R2 SUV के 10,000 रोबोटैक्सी वर्जन खरीदने पर सहमति जताई है। इतना ही नहीं, उबर और उसके फ्लीट पार्टनर्स के पास साल 2030 तक अतिरिक्त 40,000 वाहन खरीदने का विकल्प भी सुरक्षित रहेगा। रिवियन की ये गाड़ियाँ उन्नत सेंसर और सॉफ्टवेयर से लैस होंगी जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सड़क पर चलने में सक्षम होंगी।

इन शहरों से होगी शुरुआत और विस्तार की योजना

उबर की यह रोबोटैक्सी सेवा सबसे पहले अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को और मियामी जैसे शहरों में साल 2028 से शुरू होगी। इन शहरों में सफलता के बाद कंपनी का लक्ष्य साल 2031 के अंत तक अपनी इस सर्विस को अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कुल 25 बड़े शहरों तक ले जाने का है। उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही के नेतृत्व में कंपनी अब खुद को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित कर रही है जो रोबोटैक्सी बेड़े के प्रबंधन और सेवा में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।

भारत के लिए क्या है संकेत

फिलहाल यह सेवा विकसित देशों के चुनिंदा शहरों तक सीमित रहेगी। भारत जैसे घनी आबादी और जटिल ट्रैफिक वाले देशों में रोबोटैक्सी सेवा शुरू होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है। हालांकि, उबर का यह वैश्विक निवेश संकेत देता है कि आने वाले दशकों में टैक्सी सेवा का पूरा स्वरूप बदल जाएगा। भारत में इस तकनीक के आने से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोनोमस ड्राइविंग से जुड़े कानूनों में बड़े बदलाव की आवश्यकता होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट उबर और रिवियन के बीच हुए आधिकारिक समझौतों और वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। ऑटोनोमस वाहनों का संचालन स्थानीय कानूनों और तकनीकी सफलताओं पर निर्भर करेगा।

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