New Delhi, National News: देश में बढ़ते ‘ड्रॉपआउट’ (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले) बच्चों की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का फैसला किया है। ताजा सर्वेक्षणों के अनुसार, 14 से 18 साल की उम्र के करीब 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए शिक्षा मंत्रालय अब जिला स्तर पर बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ेगा।
क्यों बढ़ रही है स्कूल छोड़ने वालों की संख्या?
हालिया रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश में हर साल लगभग 50 लाख छात्र बोर्ड परीक्षाओं में फेल हो जाते हैं, जिसके बाद वे दोबारा परीक्षा देने के बजाय पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसके अलावा, कक्षा 3 से 8 के बीच के करीब 11% बच्चे भी स्कूलों से बाहर हैं। यह आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
‘NIOS मित्र’ और ब्लॉक स्तर पर स्टडी सेंटर
ड्रॉपआउट बच्चों की मदद के लिए सरकार ‘NIOS मित्र’ कार्यक्रम शुरू कर रही है। इसके तहत:
- जिला स्तर पर सर्वे करके पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की पहचान की जाएगी।
- ‘मित्र’ के रूप में नियुक्त स्वयंसेवक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे और नामांकन (Enrollment) में मदद करेंगे।
- सरकार की योजना हर ब्लॉक में कम से कम एक स्टडी सेंटर खोलने की है। इसके लिए केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और पीएम श्री स्कूलों के बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जाएगा।
छात्रों को मिलेंगी ये खास सुविधाएं
सरकार की इस नई योजना का उद्देश्य परीक्षा के डर को खत्म करना है। इसके लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से कुछ विशेष बदलाव किए गए हैं.
- ऑन डिमांड परीक्षा: छात्र अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा का समय खुद चुन सकेंगे।
- ज्यादा मौके: परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को सामान्य से अधिक अवसर दिए जाएंगे।
- वोकेशनल कोर्स: पढ़ाई के साथ-साथ व्यावसायिक प्रमाणन पाठ्यक्रम भी कराए जाएंगे, ताकि छात्र रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
- लचीलापन: नामांकन के नियमों को सरल बनाया जाएगा ताकि वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों (आदिवासी, अल्पसंख्यक, प्रवासी) के बच्चे आसानी से जुड़ सकें।
2030 तक का बड़ा लक्ष्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत सरकार ने साल 2030 तक माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत नामांकन (100% GER) हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह नई पहल उन छात्रों के लिए आशा की किरण है जो आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से नियमित स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह न्यूज़ पोर्टल शिक्षा मंत्रालय की योजनाओं और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स के आधार पर यह रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है। नियमों या योजनाओं में किसी भी बदलाव के लिए आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या संबंधित शिक्षण संस्थान से संपर्क करें। हमारा उद्देश्य केवल सूचना साझा करना है।
