Chaitra Navratri 2026: भूलकर भी मां दुर्गा को न चढ़ाएं ये ‘वर्जित’ फल! जानें पूजा और भोग से जुड़े जरूरी नियम; शास्त्रों का है सख्त आदेश

Ram Pravesh Kumar
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राम कुमार Prime Sathi पर Latest News और सरकारी योजनाओं से जुड़ा भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं। वे जटिल जानकारी को आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत...
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Religious Desk, New Delhi: चैत्र नवरात्र 2026 का त्योहार नजदीक है और भक्तगण मां दुर्गा की भक्ति में लीन होने की तैयारी कर रहे हैं। अक्सर हम सोचते हैं कि सभी ताजे फल भगवान को प्रिय होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, कुछ खास फल और तरीके ऐसे हैं जिन्हें मां दुर्गा को अर्पित करना ‘अशुद्ध’ या ‘तामसिक’ माना जाता है? मां शक्ति और पवित्रता का प्रतीक हैं, इसलिए उनकी पूजा में अत्यंत शुद्धि की आवश्यकता होती है।

मां दुर्गा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये फल

शास्त्रों के अनुसार, निम्नलिखित फलों को मां दुर्गा को अर्पित करना अपराध माना जाता है:

  • कटे-फटे या पक्षी द्वारा खाए गए फल: कभी भी ऐसे फल न चढ़ाएं जो कटे हों या जिन्हें किसी पक्षी ने चोंच मारी हो, क्योंकि वे अशुद्ध माने जाते हैं।
  • पेड़ से गिरे फल: जो फल अपने आप पेड़ से टूटकर जमीन पर गिर जाते हैं, उन्हें पूजा के योग्य नहीं माना गया है।
  • खट्टे और बेस्वाद फल: मां के सौम्य रूप की पूजा में नींबू या बहुत ज्यादा खट्टे और बेस्वाद फलों को चढ़ाने से बचना चाहिए।
  • अंदर से खराब फल: बाहर से सुंदर दिखने वाले फलों को भी अच्छे से जांच लें, क्योंकि अगर अंदर कीड़ा है तो वह भोग स्वीकार्य नहीं होता।

भोग और व्रत के अन्य जरूरी नियम

फलों के अलावा, भोग और व्रत के कुछ अन्य महत्वपूर्ण नियम भी हैं:

  • बर्तनों की शुद्धि: मां को भोग हमेशा तांबे, चांदी, पीतल या मिट्टी के शुद्ध बर्तनों में ही लगाएं। प्लास्टिक या कांच के बर्तनों का प्रयोग वर्जित है।
  • सात्विक भोग: घर में बने हलवा-पूरी या खीर के भोग में नमक या लहसुन-प्याज का स्पर्श भी नहीं होना चाहिए।
  • कलश स्थापना का नारियल: नवरात्र में कलश स्थापना के लिए जटा वाला नारियल ही उपयोग करें। अगर नारियल अंदर से खराब निकल जाए, तो घबराएं नहीं, उसे बहते जल में प्रवाहित कर मां से क्षमा मांग लें।

शास्त्रों में वर्णित प्रमाण

चैत्र नवरात्र 2026 में पूजा और भोग के ये नियम मनगढ़ंत नहीं हैं, बल्कि ‘मार्कण्डेय पुराण’ और ‘देवी पुराण’ जैसे हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में विस्तार से बताए गए हैं। इसके अलावा, ‘आचार भूषण’ जैसे ग्रंथों में भी पूजा की सामग्री की शुद्धि पर जोर दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो भोजन हम खुद नहीं खा सकते या जो अपवित्र है, उसे ईश्वर को अर्पित करना अपराध माना जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस लेख में दी गई जानकारी, उपाय या सलाह केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों (Informational Purposes) के लिए है। यह न्यूज़ पोर्टल इस लेख में व्यक्त किए गए किसी भी विचार या दावे का समर्थन नहीं करता है। लेख में निहित जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, मान्यताओं, विशेषज्ञों या उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से संकलित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ से सलाह लें या स्वयं के विवेक का उपयोग करें। हमारा पोर्टल किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता है।

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